वजीरगंज, गोण्डा, 10 नवम्बर 2024। मार्गदर्शी ट्रस्ट द्वारा जनहित में एक अनूठा कदम उठाते हुए मेनी सेन्टर खोला गया है। जिसमें आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग को संयुक्त रूप से सम्मिलित करते हुए निःशुल्क परामर्श की व्यवस्था की गयी है। ट्रस्ट के संरक्षक डॉ० विजय कुमार ने बताया कि मनुष्य की 70 प्रतिशत बीमारी विकृत दिनचर्या एवं प्रकृति से दूरी का परिणाम होती है। योग, प्राकृतिक वस्तुओं के सेवन, जड़ी बूटियों एवं आयुर्वेद के द्वारा शरीर में होने वाली 70 प्रतिशत बीमारीयों को न केवल दूर किया जा सकता है बल्कि सदैव के लिए बचा भी जा सकता है। ट्रस्टी श्री चन्दभान गुरूजी ने जानकारी दी कि शरीर स्वस्थ न रहने पर दिमाग भी स्वस्थ नहीं रह पाता इसलिए बीमारी को जानना चाहिए फिर चिकित्सा की आकांक्षा करनी चाहिए। मेनी सेन्टर से न केवल स्वस्थ्य के प्रति जागरूकता फैलेगी बल्कि लोगों को रासायनिक दवाओं के अनावश्यक घातक दुष्यप्रभावों से भी बचाया जा सकेगा। ट्रस्ट के महासचिव श्री अजय कुमार ने कहा कि मार्गदर्शी जोकि एक चेरिटेबल ट्रस्ट है, के मार्गदर्शन में मेनी सेन्टर की स्थापना विभिन्न क्षेत्रों में निरन्तर की जा रही है ताकि निरोगी काया को बलवती किया जा सके और व्यक्ति रोगों से न्यूनतम पीड़ित हो। मुख्य अतिथि श्री चक्रपाणि मौर्य जोकि मऊ के न केवल जाने-माने बैद्य हैं बल्कि कौशलेस सदन, अयोध्या में मुख्य चिकित्सक है, ने बताया कि स्वस्थ जीवन के लिए क्रमशः पॉच सोपानों का उपयोग करना चाहिए (1) दिनचर्या (2) भोजन अनुपूरण (3) योग (4) जड़ी-बूटी (5) आयुर्वेदिक औषधि। इन पाँचों सोपानों से तन और मन को इतना सुदृढ़ कर दिया जाता है कि शरीर को कोई रोग आसानी से छू न सके अर्थात मेनी सेन्टर की उपयोगिता जितना रोगी व्यक्तियों के लिए है उससे कहीं ज्यादा निरोगी व्यक्ति इससे लाभान्वित हागें। विशिष्ट अतिथि श्री अरूण कुमार पाण्डेय जोकि विश्वस्तरीय संस्कृत विद्वान व प्रोफेसर हैं ने संस्कृत के आयुर्वेदिक श्लोकों का वाचन कर लोगों को मंत्र मुग्ध करने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान से ओतप्रोत कर दिया। उन्होंने हाल ही में आयुर्वेद जीवज्ञिान विषय के सजून एवं कोड नं 105 पर इसे यू०जी०सी० नेट में जोड़े जाने की जानकारी दी। प्राकृतिक चिकित्सक भंते विमल सागर जी ने कहा कि प्रकृति में शरीर रूपी मशीनरी को ठीक करने की पूर्ण क्षमता है। महाबग्ग ग्रन्थ में प्राकृतिक चिकित्सा के जनक तथागत बुद्ध द्वारा 2500 वर्ष पहले एक सांप के विष को चिकनी मिट्टी, गोबर इत्यादि का प्रयोग करवा कर हटवाने और बीमार पड़ने पर भाप स्नान व उष्ण गर्म व ठण्डे जल के स्नान द्वारा निरोग करने का उल्लेख है।
मेनी सेन्टर के मुख्य चिकित्सक डॉ० के०के० मौर्य ने आयुर्वेद को प्रकृति के निकट रहने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि मेनी सेन्टर की खास बात यह भी है कि यह कम खर्च (Low Cost) न खर्च (No Cost) के सिद्धान्त पर कार्य करती है जिससे रोगों पर होने वाले नजायज खर्चों से बचत होती है और व्यापक स्तर पर आर्थिक हॉनि एवं असुविधाओं से बचा जा सकता है। मेनी सेन्टर चौबिसवा, बस्ती के सुपरवाइजर जवाहर लाल जी ने आयुर्वेद से मिल रहे, अप्रत्याशित लाभ से लोगों को साक्ष्यों सहित अवगत कराया।
मेनी सेन्टर का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री चक्रपाणि मौर्य जी ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर चिकित्साधिकारी अरूण कुमार, ट्रस्टी प्रतिमा मौर्य, ट्रस्टी अर्चना मौर्या, ट्रस्ट के संस्कृति प्रभारी श्री घनश्याम ‘भ्रमर’, जड़ी-बूटि उत्पादक अग्रणी किसान शिवकुमार मौर्य, उत्कृष्ट किसान सम्मान प्राप्तकर्ता राममनोहर जी, डॉ० वी०के० मौर्य, डॉ० एस०पी० मौर्य, डॉ० नन्द किशोर मौर्य, डॉ० रविन्द्र कुमार, डॉ० सुग्रीव व शिक्षक जगत से जुड़े सुशील मिश्रा, अवनीश कुमार पाण्डेय, मनोज कुमार शर्मा, आनन्द देव सिंह, कन्हैला लाल, खुशीराम, राजमणि वर्मा जी के अतिरिक्त क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति, अजय मौर्य, हरिभान मौर्य, उदयभान, इन्द्रभान, अर्जुन कुमार, अरूण कुमार गौतम, मनीष कुमार, हनुमान प्रसाद, रवि प्रकाश व क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। इस अनूठी पहल को लेकर क्षेत्रवासियों में जिज्ञासा व उल्लास का माहौल रहा और सभी ने मंगल कामना की।